गुरुवार, 28 मार्च 2013


हिंदी विवि में हर्बल होली की धूम

फगुआ  की लोक धुन पर थिरका विश्‍वविद्यालय परिवार

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के परिसर में पलाश के रंगों से होली मनाई गई। हर्बल रंगों से सराबोर लोगों ने गुलाल लगाकर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। सुबह से ही लोग खास देसी अंदाज में ढ़ोल-बाजे के साथ फगुआ के लोकगीत में रम गए। कुलपति निवास में दिन भर जोगीरा सा..रा..रा.. के बोल में लोग थिरकते रहे।
सहायक प्रोफेसर धनजी प्रसाद व उनकी टोली द्वारा प्रस्‍तुत लोकगायन और सुर‍क्षा कर्मियों के ढ़ोलक की ताल पर कुलपति विभूति नारायण रा, प्रतिकुलपति प्रो.ए.अरविंदाक्षन, कुलसचिव डॉ.के.जी.खामरे, कुलानुशासक प्रो.सूरज पालीवाल, स्‍त्री अध्‍ययन के विभागाध्‍यक्ष प्रो.शंभू गुप्‍त भी थिरकने से अपने आपको नहीं रोक पाए।
     बिरसा मुण्‍डा छात्रावास, गोरख पांडेय छात्रावास, सावित्री बाई फुले महिला छात्रावास के विद्यार्थियों ने आकर्षक ढ़ंग से ढ़ोल बाजे के साथ केदारनाथ संकुल, शमशेर संकुल, अज्ञेय संकुल जाकर खूब मस्‍ती की। होली के आकर्षण के केंद्र में था- चीन, जापान, थाईलैण्‍ड आदि देशों के बच्‍चों का रंगोत्‍सव में शामिल होना।
भोजपुरी, अवधी, मगही, मैथिली, मराठी आदि बोली में फगुआ के कई गानों का लुफ्त उठाया गया। कुलपति विभूति नारायण राय ने रंगोत्‍सव की शुभकामना देते हुए कहा कि यह पर्व असत्‍य पर सत्‍य की विजय के लिए आनंद व उल्‍लास के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। रंग मात्र से होली नहीं होती, होली के साथ प्रेम का होना जरूरी है। हर्बल होली आपलोगों ने खेला, आप सभी को हमारी ढेर सारी शुभकामनाएं। विश्‍वविद्यालय के अध्‍यापकों, अधिकारियों, कर्मियों व विद्यार्थियों ने एक-दूसरे को होली की बधाई दी।

सोमवार, 25 मार्च 2013


हिंदी विश्‍वविद्यालय ने मनाया अर्थ आवर

पर्यावरण जागरूकता के लिए बिजली बंद कर निकाला कैंडिल मार्च

धरती और प्रकृति की खातिर महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में 23 मार्च (शनिवार) को रात्रि 8.30 से 9.30 बजे तक एक घंटे के लिए बिजली बंद कर अर्थ आवर मनाया गया।
      आम जनों में ऊर्जा के इस्‍तेमाल व पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्‍य से विश्‍वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.के.जी.खामरे, वित्‍ताधिकारी संजय भास्‍कर गवई, पर्यावरण क्‍लब के प्रभारी अनिर्वाण घोष की उपस्थिति में अधिकारियों, कर्मियों व विद्यार्थियों द्वारा कैंडिल मार्च निकाला गया। कैंडिल मार्च विश्‍वविद्यालय परिसर के केदारनाथ संकुल से शुरू हुआ। यह कैंडिल मार्च सावित्री बाई फुले महिला छात्रावास से होते हुए शमशेर संकुल, हॉस्‍पीटल, फिल्‍म एवं नाट्य अध्‍ययन विभाग, अज्ञेय संकुल, नागार्जुन सराय होते हुए नजीर हाट पर समाप्‍त हुआ। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए डॉ.के.जी.खामरे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संरक्षण के लिए लोगों में दिलचस्‍पी को देखकर मैं बहुत उत्‍साहित हूँ। हम सभी को पूरे वर्ष अर्थ आवर के उद्देश्‍यों को आत्‍मसात करने की जरूरत है।
      इस दौरान पर्यावरण क्‍लब के प्रभारी अनिर्बाण घोष ने कहा कि वर्ल्‍ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूएफ) द्वारा शुरू किए गए अर्थ आवर अभियान के तहत वर्ष 2007 में आस्‍ट्रेलिया के सिडनी शहर से इसकी शुरूआत हुई और अब दुनिया भर के 131 देशों के 4,000 से ज्‍यादा शहर इस आयोजन में हिस्‍सेदारी कर रहे हैं। हमारा विश्‍वविद्यालय पर्यावरण के प्रति अतिसंवेदनशील है। अगले वर्ष से वृहद् पैमाने पर अर्थ आवर मनाने का संकल्‍प लेते हुए उन्‍होंने कहा कि पर्यावरण संकट से जूझ रही दुनिया को बचाने की मुहिम में आप अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दें, जिससे दुनिया बची रह सके। उन्‍होंने कुलपति विभूति नारायण राय, प्रतिकुलपति प्रो.ए.अरविंदाक्षन, विशेष कर्तव्‍याधिकारी नरेन्‍द्र सिंह, राष्‍ट्रीय सेवा योजना के प्रभारी डॉ.सतीश पावडे के प्रति आभार जताते हुए कहा कि हमें ये  पर्यावरण जागरूकता के लिए निरंतर प्रोत्‍साहित करते रहते हैं। अर्थ आवर मनाने के लिए भी इन्‍होंने हमें भरपूर सहयोग दिया।
      कैंडिल मार्च में विश्‍वविद्यालय के राष्‍ट्रीय सेवा योजना के सदस्‍यों ने खासी दिलचस्‍पी ली। कार्यक्रम के दौरान प्रो.शंभू गुप्‍त, डॉ.अनिल कुमार पांडेय, बी.एस.मिरगे, शैलेश मरजी कदम, शंभू जोशी, अमित विश्‍वास, डॉ.मिथिलेश, सत्‍यम सिंह, विनय भूषण, कमला थोकचोम देवी, चित्रलेखा अंशु, विनीत कुमार, राज राजेश्‍वर, भारती देवी, अनुपमा पांडेय सहित सैकड़ों कर्मी, शोधार्थी व विद्यार्थी 

शुक्रवार, 22 मार्च 2013


हिंदी विवि में प्राकृतिक रंगों से हर्बल होली

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय इस वर्ष प्राकृतिक रंगों से हर्बल होली खेलेगा। प्रकृति प्रेमी विश्‍वविद्यालय के पर्यावरण क्‍लब की ओर से इस बात के लिए अनुरोध किया गया है।
      कुलपति विभूति नारायण राय से पूछने पर उन्‍होंने बताया कि होली के पावन अवसर पर हमलोग अक्‍सर रासायनिक तत्‍वों से युक्‍त रंगों का इस्‍तेमाल करते हैं। ये रंग हमारे लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं। इनसे स्किन एलर्जी होना आम बात है और साथ ही आंख व सिर के बाल भी बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। शोधों से पता चलता है कि कई रंग ऐसे खतरनाक रसायनों से बनाए जाते हैं जिनसे कैंसर तक होने का खतरा बना रहता है। हमारा विश्‍वविद्यालय प्रकृति के प्रति अतिसंवेदनशील है। हमारा यह प्रयास रहेगा कि पलाश के फूलों से बनाए रंगों से इस वर्ष होली का आनंद उठायें जिससे पानी का कम से कम उपयोग हो।
      पर्यावरण क्‍लब के प्रभारी अनिर्बाण घोष ने बताया कि विश्‍वविद्यालय परिसर के आसपास कोई तालाब नहीं है। पक्षी प्‍यासे रह जाते हैं। कुलपति जी के मार्गदर्शन में परिसर में जगह-जगह पानी के बर्तन रखे जाएंगे ताकि पक्षी को पानी मिल सके। गौरतलब है कि 212 एकड़ में फैले परिसर में 99 एकड़ भूमि को ग्रीन जोन बेल्‍ट घोषित किया गया है। इस भूमि में कई हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं। कभी उजाड़ सी दिखने वाली पहाड़ी में हरियाली आकर्षित करती है। गांधी व कबीर पार्कों को दर्शनीय स्‍थल के रूप में जाना जाने लगा है। परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लांट लगाए जा रहे हैं जिनमें सीवर का पानी शुद्ध होकर पौधों की सिचाई में काम आएगा। निश्चित रूप से यह परिसर अब हरा भरा दिखने लगा है। 

बुधवार, 20 मार्च 2013


हिंदी विश्‍वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों ने मनाया चौथा स्‍थापना दिवस

आपात स्थिति से निपटने के दिखाए करतब
महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में सुरक्षा कर्मियों ने अपना चौथा स्थापना  दिवस मंगलवार को मनाया। इस अवसर पर समता भवन के प्रांगण में कुलपति विभूति नारायण राय ने सुरक्षा कर्मियों की सलामी ली। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों ने पथ संचलन भी किया। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. कैलाश खामरे, वित्‍ताधिकारी संजय गवई उपस्थित थे। सलामी के बाद सुरक्षा कर्मी एवं राष्‍ट्रीय सेवा योजना के छात्रों ने आकस्मिक स्थिति में किसी भी आपदा से निपटने के बारे में करतब दिखाए। राष्‍ट्रीय सेवा योजना के छात्र और सुरक्षा कर्मी एक तरफ कुटिया में लगी आग बुझाते हुए नजर आए तो दूसरी तरफ बम विस्‍फोट की स्थिति के बाद पैदा हुए हालात पर काबू पाते नजर आए। इसके पश्‍चात स्‍वामी सहजानंद सरस्‍वती संग्रहालय में आयोजित समारोह में कुलपति विभूति नारायण राय ने सभी सुरक्षा कर्मियों को बधाई दी। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. कैलाश खामरे, वित्‍ताधिकारी संजय गवई, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. अनिल के. राय अंकित, राष्‍ट्रीय सेवा योजना के संयोजक डॉ. सतीश पावडे तथा सुरक्षा अधिकारी राजेन्‍द्र घोडमारे मंचस्‍थ थे। कार्यक्रम का संचालन नाट्कला एवं फिल्‍म अध्‍ययन का छात्र श्रीकृष्‍ण पांडे ने किया तथा धन्‍यवाद ज्ञापन जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे ने प्रस्‍तुत किया। इस अवसर पर प्रो. रामशरण जोशी, प्रो. सुरेश शर्मा, अशोक मिश्र, नरेन्‍द्र सिंह, राकेश श्रीमाल, राजेश यादव, अमित विश्‍वास सहित सुरक्षा कर्मी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे। 

मंगलवार, 19 मार्च 2013


गुणवत्‍तापूर्ण हो दूर शिक्षा : प्रो.अरविंदाक्षन

हिंदी विवि में दूर शिक्षा की सामाजिक प्रासंगिकता पर आधारित त्रिदिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का हुआ समापन

दूर शिक्षा का मतलब सिर्फ डिग्रियां देना नहीं है अपितु यहां के विद्यार्थी सामाजिक-आर्थिक व सांस्‍कृतिक विकास में अपना अभिन्‍न योगदान दे सकें। वर्ल्‍ड बैंक, आईएमएफ के इशारे पर चलने वाली शिक्षा व्‍यवस्‍था से हमारा सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है। परंपरागत शिक्षा की भांति ही हमें दूर शिक्षा के प्रति लोगों में विश्‍वास जगाना होगा। दूर शिक्षा को रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के साथ ही बेहतर नागरिक कैसे बने, इस पर भी हमें ध्‍यान देने की जरूरत है। हमारा यह प्रयास हो कि दूर शिक्षा गुणवत्‍तापूर्ण हो।                                                           उक्‍त उदबोधन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के प्रतिकुलपति व दू‍र शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो.ए.अरविंदाक्षन ने व्‍यक्‍त किए। वे विश्‍वविद्यालय व भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दूर शिक्षा की सामाजिक प्रासंगिकता विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी के समापन सत्र में अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य देते हुए बोल रहे थे।
      हबीब तनवीर सभागार में आयोजित भव्‍य समापन समारोह में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली के निदेशक प्रो.के.एल.खेड़ा ने संगोष्‍ठी में उपजे विमर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां तीन दिनों में जो शोध पत्र पढ़े गए उसे पुस्‍तकाकार रूप देने में हम यथायोग्‍य मदद करेंगे ताकि यह दूर शिक्षा के लिए मील का पत्‍थर साबित हो। उन्‍होंने कहा कि दूर शिक्षा में बढ़ रहे वाणिज्‍यीकरण को हमें रोकना होगा। शिक्षा द्वारे-द्वारे की भावना को साझा करते हुए उन्‍होंने कहा कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए हमें स्‍थानीय भाषा में पाठ्य सामग्री उपलब्‍ध कराना होगा।
      स्‍त्री अध्‍ययन विभाग की प्रो.वासंती रामन ने कहा कि आज की शिक्षा व्‍यवस्‍था को देखकर लगता है कि हमारी कल्‍याणकारी राज्‍य की अवधारणा खतम होती जा रही है। उन्‍होंने सवाल उठाया कि क्‍या गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा सिर्फ अमीरों के लिए है। दूर शिक्षा में तकनीक आधारित शिक्षा की बात की जा रही है। तकनीक आधारित व्‍यवस्‍था हमें सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक व सांस्‍कृतिक संदर्भों से हटाकर रोबोट में तब्‍दील कर रहे हैं। विश्‍व बैंक जैसी संस्‍थाओं की नीतियां यही बताती है कि हम रोबोट में तब्‍दील होकर काम करें, कोई सवाल न करें। दूर शिक्षा में सिर्फ रोजगार के पाठ्यक्रम ही नहीं हो अपितु सामाजिक विज्ञान के विषयों को यथायोग्‍य स्‍थान दिया जाना चाहिए। दलितों, महिलाओं के विकास हेतु पाठ्यक्रमों को अपनाए जाने की जरूरत है।
      कार्यक्रम का संचालन दूर शिक्षा निदेशालय के क्षेत्रीय निदेशक डॉ.जे.पी.राय ने किया तथा कुलसचिव डॉ.के.जी.खामरे ने आभार व्‍यक्‍त किया। इस अवसर पर प्रो.रामशरण जोशी, प्रो.संतोष भदौरिया, प्रो.सुरेश शर्मा, डॉ.बी.के.श्रीवास्‍तव, अशोक मिश्र, डॉ.रवीन्‍द्र टी.बोरकर, संगोष्‍ठी के संयोजक अमरेन्‍द्र कुमार शर्मा, शैलेश मरजी कदम, डॉ.सुरजीत कु.सिंह, डॉ.अशोक नाथ त्रिपाठी अनिर्बाण घोष, अमित राय, सुनील कु.सुमन, चित्रा माली, विधु खरे दास, अमित विश्‍वास, रयाज हसन सहित बड़ी संख्‍या में अध्‍यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। 

शिक्षकेतर कर्मचारी संगठन का निर्विरोध चुनाव

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में शिक्षकेतर कर्मचारी संगठन की कार्यकारिणी निर्विरोध घोषित की गयी। कार्यकारिणी में संगठन के अध्‍यक्ष के रूप में विजयपाल पाण्‍डेय, उपाध्‍यक्ष तुषार वानखडे, महासचिव मनोज कुमार द्विवेदी, संयुक्‍त सचिव समीर अवस्‍थी, कोषाध्‍यक्ष अतुल सोबती को चुना गया तथा कार्यकारिणी के सदस्‍य के रूप में पंकज पाटिल, रामप्रसाद कुमरे, ऋचा श्रीवास्‍तव, प्रदीप गंगाधर आदे, राजेन्‍द्र मते व आनंदकुमार विश्‍व‍कर्मा को भी निर्विरोध चुना गया। कार्यकारिणी के सदस्‍यों को चुनाव अधिकारी तथा सहायक कुलसचिव राजेश्‍वर सिंह ने हबीब तनवीर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी।  

सोमवार, 18 मार्च 2013


शिक्षा व्‍यवस्‍था की नई चुनौतियों से मुठभेड़ करने की है जरूरत: प्रो.भदौरिया

हिंदी विवि में दूर शिक्षा की तकनीक और पाठ्य-सामग्री की गुणवत्‍ता का सवाल सत्र में वक्‍ताओं ने किया विमर्श

वर्धा, 18 मार्च,2013; सन् 1985 में नई शिक्षा पद्धति के तहत हाशिए के लोगों को मुख्‍यधारा में शामिल करने के लिए दूर शिक्षा पद्धति की शुरूआत की गई। दूर शिक्षा सहित परंपरागत शिक्षा पद्धति भी जिस संकट में है, पेशेगत नैतिकता उसे कहने से हमें रोकती है। तमाम अखबारों में शिक्षा और शिक्षक को कोसा जा रहा है। परंपरागत स्‍कूली शिक्षा व्‍यवस्‍था दलिया और मध्‍यान्‍ह् भोजन में सिमटती जा रही है। स्‍कूलों में अध्‍ययन-अध्‍यापन की संस्‍कृति खतम होती जा रही है। वर्ल्‍ड बैंक, आईएमएफ के इशारे पर चलने वाली शिक्षा व्‍यवस्‍था से हमारा सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है। क्‍या हम किसी ठेके की व्‍यवस्‍था से शिक्षा को नई ऊंचाईयां दे सकते हैं। दूर शिक्षा को दुधारू गाय समझा जाता है, व्‍यवसाय के उद्देश्‍य से डिग्री बांटने से गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा की बात नहीं की जा सकती है। आज शिक्षा का उद्देश्‍य सिर्फ साक्षर बनाना रह गया है। हमें सूचना आधारित समाज में तब्‍दील किया जा रहा है। आज भूमंडलीकृत विश्‍व में शिक्षा व्‍यवस्‍था के समक्ष जो चुनौतियां हैं, उससे मुठभेड़ करनी होगी और उसके लिए हमें विकल्‍प तलाशने होंगे।
       उक्‍त उदबोधन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के इलाहाबाद केंद्र के प्रभारी प्रो.संतोष भदौरिया ने व्‍यक्‍त किए। वे विश्‍वविद्यालय व भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दूर शिक्षा की सामाजिक प्रासंगिकता विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी के छठे सत्र में अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य देते हुए बोल रहे थे।
       हबीब तनवीर सभागार में दूर शिक्षा की तकनीक और पाठ्य-सामग्री की गुणवत्‍ता का सवाल विषय पर आधारित सत्र में विवि के दूर शिक्षा निदेशालय के क्षेत्रीय निदेशक डॉ.रवींद्र टी.बोरकर ने मुख्‍य वक्‍तव्‍य में कहा कि टीचर सोशल इंजीनियर होते हैं, दूर शिक्षा के विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु व्‍यक्तिगत व्‍यवहार पर ध्‍यान दिया जाना चाहिए। दूर शिक्षा निदेशालय के सहायक प्रोफेसर शैलेश मरजी कदम ने ई-लर्निंग, ई-बिजनेस, ई-मार्केटिंग आदि का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्‍य में कोई भी कार्य ई के बगैर नहीं होगा, इसलिए दूर शिक्षा को ई लर्निंग का हिस्‍सा बनाना चाहिए। साहित्‍य विद्यापीठ के सहायक प्रोफेसर डॉ.अशोक नाथ त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा का कार्य ज्ञान का प्रसार करना है। शिक्षा के क्षेत्र में दूरस्‍थ शिक्षा को क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्‍यम कहा जाता है। ऐसी शिक्षा व्‍यवस्‍था को तकनीक और प्रौद्योगिकी से जोड़े जाने की जरूरत है।
       भदन्‍त आनन्‍द कौसल्‍यायन बौद्ध अध्‍ययन केंद्र के प्रभारी डॉ.सुरजीत कुमार सिंह ने कहा कि बौद्ध अध्‍ययन में ज्ञान की अपार संभावनाएं हैं, इसे दूर शिक्षा में अहम स्‍थान दिया जाना चाहिए। भगवान बुद्ध ने लोकभाषा में ज्ञान का प्रसार किया, दूर शिक्षा को भी लोकभाषा में दी जाने की परंपरा विकसित होनी चाहिए साथ ही इसे चार दीवारी से बाहर निकल कर शोषण मुक्‍त समाज के निर्माण में अपना अमूल्‍य योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर चन्‍द्रशेखर झा, सदानंद चौधरी, अर्चना नामदेव ने भी दूरस्‍थ शिक्षा में तकनीक की प्रासंगिकता के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रोफेसर शंभु जोशी ने किया। कार्यक्रम में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली के निदेशक प्रो.के.एल.खेड़ा, प्रो.रामशरण जोशी, प्रो.सुरेश शर्मा, प्रो.वासंती रामन, डॉ.बी.के.श्रीवास्‍तव, डॉ.जे.पी.राय, अशोक मिश्र, संगोष्‍ठी के संयोजक अमरेन्‍द्र कुमार शर्मा, अनिर्बाण घोष, अमित राय, सुनील कु.सुमन, चित्रा माली, बी.एस.मिरगे, अमित विश्‍वास, विधु खरे दास, रयाज हसन सहित बड़ी संख्‍या में अध्‍यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। 

रविवार, 17 मार्च 2013


पारंपरिक शिक्षा के साथ चले दूर शिक्षा -प्रो. सत्‍यकाम

हिंदी विश्‍वविद्यालय में दूर शिक्षा पर राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी में वक्‍ताओं ने रखे विचार

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दूर शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित संगोष्‍ठी के दूसरे दिन रविवार को ‘वैकल्पिक, पूरक शिक्षा बनाम पारंपरिक शिक्षा’ सत्र में अध्‍यक्षीय टिप्‍पणी करते हुए प्रख्‍यात आलोचक एवं इग्‍नू के मानविकी संकाय के प्रो. सत्‍यकाम ने कहा कि दूरस्‍थ शिक्षा और पारंपरिक शिक्षा साथ-साथ चलें न कि एक दूसरे के प्रति प्रतिस्‍पर्धा की भावना रखें। आज परंपरागत विश्‍वविद्यालयों को मिल रहे सहयोग की तुलना में हमें सरकार उतनी सहायता नहीं देती। उन्‍होंने कहा कि दूर शिक्षा के पाठ्यक्रम की किताबों को पढ़कर बहुत से शिक्षक अपने परंपरागत शिक्षा केंद्रों में पढ़ाते है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में इन पाठ्यक्रमों की मदद भी लेते हैं। उन्‍होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज निजी केंद्रों के माध्‍यम से दूर शिक्षा संचालित की जा रही है जो कि विश्‍वसनीयता का संकट पैदा कर रही है। अपने वक्‍तव्‍य का समापन करते हुए प्रो. सत्‍यकाम ने कहा कि आज यहां सभी वक्‍ताओं ने संक्षेप में विषय को लेकर काफी उपयोगी बातें कही, जिनका इस्‍तेमाल हम भविष्‍य में कर सकते हैं। प्रो. कमलेश मिश्र ने कहा कि आज दूर शिक्षा को लेकर जो आंकडे दिए जा रहे हैं वे शहरी इलाकों के आसपास के है न कि ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। नीलेश भगत ने कहा कि दूर शिक्षा में मोबाइल सेवा का उपयोग किया जाना चाहिए। डॉ. आर. टी. बेन्‍द्रे, संजय खंडेलवाल, मनोज कुमार आदि ने अपने विचार व्‍यक्‍त किये। प्रात: आयोजित सत्र में वी. के. श्रीवास्‍तव, पुरंदर दास, शंभू शरण गुप्‍त, अर्चना शर्मा ने अपने पर्चे पढ़े जिस पर राजर्षि पुरुषोत्‍तम दास टंडन मुक्‍त विश्‍वविद्यालय, इलाहाबाद के पूर्व कुलपति प्रो. नागेश्‍वर राव ने अध्‍यक्षीय टिप्‍पणी की। सत्र का संचालन दूर शिक्षा के सहायक प्रोफेसर शंभू जोशी ने किया। इस मौके पर दूर शिक्षा विभाग के प्रो. रामशरण जोशी, डॉ. जयप्रकाश राय, अमित राय, अमरेन्‍द्र शर्मा, शैलेश कदम मरजी, संदीप सपकाले, सुशील पखिड़े, विनोद वैद्य आदि सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

प्रो. के. एल. खेड़ा ने दी योजनाओं की जानकारी

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दूर शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित संगोष्‍ठी के दूसरे दिन रविवार को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के निदेशक प्रो. के. एल. खेड़ा ने अनुसंधान के लिए शोधकर्ताओं को धन मुहैया कराने से संबंधित तमाम योजना और कार्यक्रमों के बारे में विस्‍तार से जानकारी प्रदान की। उन्‍होंने कहा कि शोध के लिए बड़े शहरों के प्रस्‍तावों की तुलना में छोटे शहरों से आने वाले प्रस्‍ताव परिषद द्वारा तय किये गये मानक के अनुरूप नहीं होते है। ऐसे में इन प्रस्‍तावों को अस्‍वीकृत कर दिया जाता है। उन्‍होंने कहा कि शोध प्रारूप बनाते समय तीन बिदूओं पर विशेष ध्‍यान देना चाहिए, वह तीन बिंदू है- शोध प्रारूप में आप क्‍या करना चाहते हैं, क्‍यों करना चाहते हैं और कैसे करना चाहते है। इन बिंदूओं पर आधारित शोध प्रारूप बनाया जाए तो इसे परिषद द्वारा स्‍वीकार कर उस शोधार्थी को धन मुहैया कराने में मदद मिल सकती है। इस अवसर पर विश्‍वविद्यालय के प्रतिकुलपति तथा दूर शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. ए. अरविंदाक्षन ने कहा कि शिक्षकों के विकास के लिए एक प्रस्‍ताव भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद को भेजा जाएगा जिसके स्‍वीकृत होने पर शोध प्रविधि पर एक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा और इस कार्यशाला के माध्‍यम से शिक्षक तथा शोधार्थी लाभान्वि‍त हो सकेंगे। इस दौरान नांदेड के आर. टी. बेन्‍द्रे, रानी दूर्गावती विश्‍वविद्यालय, जबलपुर के अकादमिक स्‍टाफ कॉलेज के निदेशक प्रो. कमलेश मिश्र, प्रो. रामशरण जोशी, डॉ. जयप्रकाश राय, अमित राय, अमरेन्‍द्र शर्मा, डॉ. प्रीति सागर, शैलेश कदम मरजी, संदीप सपकाले, चित्रा माली, डॉ. अख्‍तर आलम, राजेश लेहकपुरे, डॉ. वीर पाल सिंह यादव, राकेश यादव, राजेन्‍द्र कटरे, हर्षा, प्रदीप त्रिपाठी, अनिल विश्‍वा, शम्‍भू शरण गुप्‍त, रफिक अली, यदुवंश यादव, मो. अमीर पाशा, राम शंकर पाल, विकास चंद्र, बलवीर सिंह, अमृत कुमार, रूद्रेश नारायण, अनुपमा कुमारी, संजय खंडेलवाल रांची, अजय कुमार सरोज, कुमारी अंकिता मिश्रा आदि सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। 

शनिवार, 16 मार्च 2013


दूर शिक्षा हो ऑनलाइन – विभूति नारायण राय

दूर शिक्षा की सामाजिक प्रासंगिकता पर राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का हुआ उदघाटन

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि  हमारे देश के सामाजिक ढांचें में यूरोपीय देशों की तुलना में दूर शिक्षा के लिए अधिक गुजांइश है। उन्‍होंने कहा कि परंपरागत शिक्षा जैसे-जैसे महंगी होगी वैसे ही दूर शिक्षा का म‍हत्‍व बढ़ता जाएगा। हमें यह प्रयास करने की जरूरत है कि दूर शिक्षा कैसे गुणवत्‍तापूर्ण, सस्‍ती और सर्वसुलभ बनाई जा सके।
वे विश्‍वविद्यालय और भारतीय सामाजिक विज्ञान परिषद, नई दिल्‍ली के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दूर शिक्षा की सामाजिक प्रासंगिकता विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी के उदघाटन सत्र की अध्‍यक्षता करते हुए बोल रहे थे। इस अवसर पर राजर्षि टण्‍डन मुक्‍त विश्‍वविद्यालय, इला‍हाबाद के पूर्व कुलपति प्रो.नागेश्‍वर राव, विवि के दूर शिक्षा निदेशालय के निदेशक व प्रतिकुलपति प्रो.ए.अरविंदाक्षन, डॉ.जे.पी. रा, अमरेन्‍द्र कुमार शर्मा व शंभु जोशी मंचस्‍थ थे।
श्री विभूति नारायण राय ने कहा कि हमें दूर शिक्षा के लिए तकनीक और प्रौद्योगिकी की मदद लेनी चाहिए। हमारी योजना है कि हम विद्यार्थियों को पाठ्यसामग्री प्रिंटेड बुक की बजाय ऑनलाइन उपलब्‍ध कराएं। हालांकि कुछ समस्‍याएं हैं लेकिन हमें इसके समाधान के विकल्‍पों के बारे में विचार करना चाहिए। हमारा दूर शिक्षा निदेशालय संचार एवं मीडिया अध्‍ययन केंद्र के आधुनिकतम प्रौद्योगिकी युक्‍त पराडकर मीडिया लैब व फिल्‍म अध्‍ययन विभाग से जुड़कर दूर शिक्षा के लिए अध्‍ययन सामग्री का निर्माण करे जिससे दूर-दराज के विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें।
हबीब तनवीर सभागार में आयोजित संगोष्‍ठी में उद्घाटन वक्‍तव्‍य देते हुए  प्रो.नागेश्‍वर राव ने कहा कि दूर शिक्षा में आठ प  और चार प्रकोष्‍ठ पर विशेष ध्‍यान दिया जाना चाहिए। उन्‍होंने आठ प (प्रवेश, परामर्श, पाठ्यसामग्री, पुस्‍तकालय, परीक्षा, प्‍लेसमेंट, प्रावीण्‍यता, पूर्व छात्रों के लिए कन्‍वोकेशन) और चार प्रकोष्‍ठ (जागरूकता, चिंतन, गुणवत्‍ता व शोध) को संदर्भित करते हुए कहा कि दूरस्‍थ शिक्षा का भविष्‍य उज्‍ज्‍वल है।
शुरुआत में मंचस्‍थ अतिथियों का स्‍वागत पुष्‍पगुच्‍छ प्रदान कर किया गया। स्‍वागत वक्‍तव्‍य में प्रतिकुलपति प्रो.ए.अरविंदाक्षन ने कहा कि हमें यह प्रयास करने की जरूरत है कि दूर शिक्षा के विद्यार्थी सिर्फ डिग्री के लिए नहीं अपितु कैसे सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में दक्ष हो सकें। कार्यक्रम का संचालन शंभु जोशी ने किया तथा डॉ.जे.पी.राय ने आभार व्‍यक्‍त किया। संगोष्‍ठी के संयोजक अमरेन्‍द्र कुमार शर्मा ने त्रिदिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी के उद्देश्‍यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो.सत्‍यकाम, प्रो.मनोज कुमार, प्रो.अनिल के.राय अंकि’, प्रो.वासंती रामन, प्रो.राम शरण जोशी, प्रो.देवराज, प्रो.के.के.सिंह, डॉ.खंडेलवाल सहित बड़ी संख्‍या में अध्‍यापक, कर्मी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे।
अगले दो दिनों तक होगा विमर्श – त्रिदिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी के दूसरे दिन 17 मार्च को 10 बजे से दूर शिक्षा: भविष्य की सम्भावनाएँ विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता प्रो.नागेश्वर राव करेंगे। मुख्य वक्तव्य प्रो.वी.के. श्रीवास्तव प्रस्तुत करेंगे। तृतीय सत्र वैकल्पिक व पूरक शिक्षा बनाम पारंपरिक शिक्षा विषय पर होगा जिसकी अध्यक्षता इग्‍नू के प्रो.सत्यकाम करेंगे। सामाजिक विज्ञान में शोध की रूपरेखा और संभावनाएँ विषय पर चतुर्थ सत्र होगा। इस सत्र में सामाजिक विज्ञान में शोध की रूपरेखा और शोध की संभावनाओं पर भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के निदेशक प्रो.के.एल.खेड़ा द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के शोध संबंधी योजनाओं व अनुदानों पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधार्थियों से चर्चा करेंगे। पांचवा सत्र शिक्षा का लोकतंत्र : हाशिए के समाज तक दूर शिक्षा की पहुँचविषय पर होगा। सत्र की अध्यक्षता प्रो.वी. के श्रीवास्तव करेंगे। प्रो.रामशरण जोशी मुख्य वक्तव्य देंगे। संगोष्‍ठी का समापन 18 मार्च को होगा। 

बुधवार, 13 मार्च 2013


संजीव की रचनाओं में है आम आदमी की पीड़ा : विभूति नारायण राय

हिंदी विवि में राइटर-इन रेजीडेंस संजीव को दी गई विदाई  

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के फैकल्‍टी एण्‍ड ऑफीसर्स क्‍लब में आयोजित एक भव्‍य समारोह में कुलपति विभूति नारायण राय ने राइटर-इन-रेजीडेंस संजीव को चरखा, प्रतीक चिन्‍ह आदि प्रदान कर विदाई दी। विदाई समारोह में विवि के प्रतिकुलपति प्रो.ए.अरविंदाक्षन, राइटर-इन-रेजीडेंस विजय मोहन सिंह मंचस्‍थ थे।
अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य में कुलपति विभूति नारायण राय ने संजीव के स्‍वस्‍थ व दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि वह एक ऐसे रचनाकार हैं, जो अनुसंधानात्‍मक प्रवृति से एक ठोस कार्य करते हैं। उनकी कथनी और करनी में कहीं भी कोई फांक नहीं दिखता है। उनकी रचनाओं में आम आदमी की पीड़ा और दुख-दर्द परिलक्षित होता है। वे निरन्‍तर समय और समाज के यथार्थ को सामने लाते हैं। उन्‍होंने कहा कि विश्‍वविद्यालय के अध्‍यापक और विद्यार्थी इनसे लगातार संवाद कर लाभान्वित होते रहे हैं।
विश्‍वविद्यालय में एक वर्ष बिताए पलों को साझा करते हुए संजीव ने कहा कि यहां के वातावरण को देखकर मैं अभिभूत हूँ। यहां निरंतर विद्वानों से संवाद करने और किसानों की आत्‍महत्‍या के कारणों को देख सका। उन्‍होंने कहा कि अनुसंधान की प्रवृति ने ही मुझे रचनाकार बनाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायी है। उन्‍होंने बताया कि मैं सुबह के उजालों को देखने के लिए रात की गहरे अंधकार में उतरता हूँ और सोचता रहता हूँ कि कैसे यह अंधेरा हमारी जिंदगी से भी छंटता है और उस अंधेरे में अपने पात्रों से रू-ब-रू होता हूँ।
साहित्‍य विद्यापीठ के विभागाध्‍यक्ष प्रो.के.के.सिंह ने स्‍वागत वक्‍तव्‍य में संजीव की रचनाधर्मिता को रेखांकित करते हुए कहा कि वे एक ऐसे कहानीकार हैं, जिन्‍हें भारतीय लोकजीवन से सच्‍ची मोहब्‍बत है। लेखक का सम्‍मान पुरस्‍कार नहीं अपितु उनको पढ़ा जाना है। उन्‍होंने कहा कि अपराध सर्कस’, सावधान नीचे आग है’, सूत्रधार’, जंगल जहॉं शुरू होता है’, प्रेरणास्‍त्रोत’, रह गईं दिशाऍं इसी पार जैसी रचनाएं हिंदी जगत में पढ़ी जाती हैं। उनकी पॉंव तले की दूब उपन्‍यास को पढ़कर ऐसा महसूस होता है कि इनकी रचनात्‍मकता जमीन से जुड़ी दूब जैसी है।
क्‍लब के सचिव अमरेन्‍द्र कुमार शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस मौके पर राजकिशोर, प्रो.आर.पी.सक्‍सेना, प्रो.हनुमान प्रसाद शुक्‍ल, जय प्रकाश धूमकेतु’, अशोक मिश्र, अनिर्बाण घोष, डॉ. हरीश हुनगुन्‍द, अमित विश्‍वास सहित बड़ी संख्‍या में क्‍लब के सदस्‍य उपस्थित थे।   

सोमवार, 11 मार्च 2013


जर्मनी से हिंदी सीखने आए 24 छात्रों ने किया पाठ्यक्रम पूरा
हिंदी विवि में विदाई समारोह
 महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में जर्मनी और आस्ट्रिया से 24 छात्रों का एक दल हिंदी सीखने आया था। इन छात्रों ने गहन हिंदी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। पाठ्क्रम की समाप्ति पर उन्‍हें भाषा विद्यापीठ के सभागार में प्रमाणपत्र देकर विदाई दी गयी। जर्मनी के हम्‍बुर्ग विश्‍वविद्यालय के डॉ. रामप्रसाद भट्ट के नेतृत्‍व में 24 छात्र विश्‍वविद्यालय में हिंदी सीखने आये थे।
उनके लिए 11 फरवरी से कक्षाएं चलाई गयी जिसमें उन्‍हें हिंदी भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्‍कृति, इतिहास और भारतीय हिंदी फिल्‍में आदि से रूबरू कराया गया। इन छात्रों ने कोटंबा गांव का भ्रमण कर ग्रामीण परिवेश की जानकारी ली। कुलसचिव डॉ. कैलाश खामरे की अध्‍यक्षता में सम्‍पन्‍न विदाई समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. देवराज उपस्थित थे। प्रारंभ में भाषा विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्‍ल ने स्‍वागत वक्‍तव्‍य दिया। इस समारोह में सभी छात्रों को कुलसचिव डॉ. कैलाश खामरे व प्रो. देवराज के द्वारा प्रमाणपत्र तथा स्‍मृतिचिन्‍ह प्रदान किये गये। इस दौरान रामप्रसाद भट्ट ने बताया कि वर्धा में हिंदी विश्‍वविद्यालय में आने के लिए 45 छात्रों के आवेदन प्राप्‍त हुए थे। जर्मनी में हिंदी के प्रति खास लगाव है जिससे वहां के छात्र भारत में हिंदी सीखने के लिए हिंदी विश्‍वविद्यालय का रूख करते हैं। उन्‍होंने विश्‍वास जताया कि आगामी सत्र में अधिक से अधिक छात्र विश्‍वविद्यालय में आएंगे। उन्‍होंने कुलपति विभूति नारायण राय और प्रतिकुलपति एवं विदेशी शिक्षण प्रकोष्‍ट के प्रभारी प्रो. ए. अरविंदाक्षन का भी आभार जताया। ज्ञात हो कि विश्‍वविद्यालय में विभिन्‍न देशों के छात्रों का आना लगातार जारी है। वर्तमान में चीन, थाईलैंड तथा जर्मनी के छात्र यहां अध्‍यनरत हैं। विदाई समारोह का संचालन भाषा विद्यापीठ में स्‍पेनिश भाषा के सहायक प्रोफेसर रवि कुमार ने किया तथा धन्‍यवाद ज्ञापन प्रौद्योगिकी अध्‍ययन केंद्र के निदेशक प्रो. विजय कुमार कौल ने प्रस्‍तुत किया। समारोह में अश्‍वनी कुमार श्रीवास्‍तव, डॉ. प्रीति सागर, डॉ. हरीश हुनगुंद, डॉ. अनिल कुमार दुबे, बी. एस. मिरगे आदि सहित छात्र-छात्रांए उपस्थित थे। 

गुरुवार, 7 मार्च 2013


भाषाई संकट से जूझ रही है हिंदी पत्रकारिताः विकास मिश्र

विकास मिश्र को रवींद्र साहित्य भेंट करते जेके भारती, राजेंद्र राय और डा. कृपाशंकर चौबे।
वरिष्ठ पत्रकार तथा लोकमत समाचार के संपादक विकास मिश्र ने कहा है कि हिंदी पत्रकारिता आज भाषाई संकट से जूझ रही है। श्री मिश्र महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कोलकाता केंद्र में पत्रकारिता के बदलते दौर विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।  उन्होंने कहा कि आज हिंदी पत्रकारिता में अंग्रेजी शब्दों के बहुतायत प्रयोग के कारण कई बार वह हिंग्लिश की पत्रकारिता प्रतीत होती है। यदि इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया तो इसके सांघातिक परिणाम होंगे। श्री मिश्र ने कहा कि भाषाई संकट के बावजूद पत्रकारिता में मिशन का भाव पूरी तरह लुप्त नहीं हुआ है। आज भी कई पत्रकार हैं जिन्होंने पेशे की पवित्रता पर आंच नहीं आने दी। वे न बिके न अपनी पत्रकारिता को बिकाऊ माल का प्रवक्ता होने दिया। उन्होंने कहा कि नकारात्मक प्रवृत्ति को प्रकाशित-प्रसारित करने से मीडिया को बचना होगा। महाराष्ट्र में आज कोई दल यदि बिहारियों के प्रति विद्वेष रखता है तो उसे यदि कवर करना बंद कर दिया जाए तो वह प्रवृत्ति खुद-ब-खुद कम होती जाएगी। संगोष्ठी को प्रो. सुभाष मंडल, प्रो. जेके भारती, प्रो. प्रतीक सिंह, कृष्णानंद भारती और मनीषा यादव ने भी संबोधित किया। संगोष्ठी की  अध्यक्षता करते हुए समाजवादी चिंतक राजेंद्र राय ने कहा कि यदि पत्रकारों ने अपनी कलम बेच दी तो देश के रहनुमा देश को बेच देंगे। संगोष्ठी के दूसरे सत्र में विकास मिश्र से संवाद का कार्यक्रम रखा गया।  समापन वक्तव्य देते हुए महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर तथा कोलकाता केंद्र के प्रभारी डा. कृपाशंकर चौबे ने कहा कि पत्रकारिता में घर कर गईं विकृतियों की पहचान यदि हो रही है तो यही आश्वासन भी है कि उसे दूर भी किया जा सकता है।

रविवार, 3 मार्च 2013


ग्रंथोत्‍सव में हिंदी विश्‍वविद्यालय के स्‍टॉल को मारूती चितमपल्‍ली ने दी भेंट

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय द्वारा वर्धा में चल रहे ग्रंथोत्‍सव में प्रका‍शन विभाग द्वारा पुस्‍तकों का स्‍टॉल लगाया गया है। इस स्‍टॉल को ग्रंथोत्‍सव के उदघाटक एवं जाने-माने साहित्‍यकार मारूती चितमपल्‍ली, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, नागपुर के संचालक भि. म. कौशल, जिला सूचना कार्यालय, वर्धा के अधिकारी अनिल गडेकर, मिलिंद आवले, पत्रकार आनंद शुक्‍ल, राजेश मडावी, प्रकाश कथले, प्रवीण धोपटे, संजय इंगले तिगांवकर, राजेन्‍द्र मुंढे, प्रदीप दाते, मुरलीधर बेलखोडे  आदि  सहित अनेक गणमान्‍य नागरिक तथा छात्रों ने भेंट दी। यह ग्रंथोत्‍सव व सांस्‍कृतिक महोत्‍सव 2 से 4 मार्च तक आयोजित किया गया है जिसमें महाराष्‍ट्र भाषा विभाग, महाराष्‍ट्र राज्‍य साहित्‍य एवं संस्‍कृति मंडल, मुंबई, जिला सूचना कार्यालय, ग्रंथोत्‍सव आयोजन समित द्वारा आयोजित किया गया है।
विश्‍वविद्यालय की ग्रंथ प्रदर्शनी का संयोजन जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे ने किया है तथा उन्‍हें धीरेश ओझा तथा सुरेश कुमार का सहयोग प्राप्‍त हुआ। इस स्‍टॉल पर युवा छात्र तथा छात्राएं पाठ्यक्रम में अधिक रूचि लेते दिखाई दिए।